बालों में पोषक तत्वों की कमी, वृद्धावस्था, वंशानुगत असर और विजातीय द्रव्यों आदि की वजह से सिर के बाल झड़-झड़ कर गिरने लगते हैं और देखते ही देखते सिर गंजा हो जाता है।  बाल व्यक्तित्व का  महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।  बालविहीन चेहरा अनाकर्षक  व उम्र से अधिक लगता है। 

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार  गंजापन की विकृति अनेक कारणों से होती है, किंतु आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार रक्त एवं पित्त कुपित होकर वायु के जरिए रोमकूपों में पहुंचकर रोमों  को नष्ट कर देती है, जिससे बाल गिरने लगते हैं।  रोमकूपों में रक्त युक्त कफदोष पहुंचकर अवरोध कर देता है इस वजह से नए बालों का उगना रुक जाता है। 

गंजापन रोग में सिर के ऊपरी भाग के बाल अधिक झड़ते हैं और किसी-किसी की दाढ़ी एवं मूछों के बाल भी उड़ जाते हैं, क्योंकि मासिकस्त्राव होने से उनका रक्त दोष दूर होता रहता है और रोमकूप कफ के कारण अवरुद्ध  नहीं हो पाते हैं। 


                                                                             औषधीय प्रयोग:


  • बड़ के पत्तों की 20-25 ग्राम राख 100 ग्राम अलसी के तेल में मिलाकर मसलते रहने से सिर के बाल उग आते हैं। 
  • स्वच्छ बड़ के कोमल पत्तों के रस में समभाग सरसों का तेल मिलाकर आग पर पकाकर तेल सिद्ध कर लें और तेल को बालों में लगाने से केशों  के सब विकार दूर होते हैं। 
  • बड़ की जटा और जटामासी  का चूर्ण 25-25 ग्राम, तिल का तेल 400 ग्राम तथा गिलोय का रस 2 किलो सबको मिलाकर धूप में रखें।  जल सूख जाने पर तेल को छान लें और इस तेल से सिर की मालिश करें।  इससे गंज दूर होकर बाल उगने लगते हैं और बालों का गिरना बंद हो जाता है तथा बाल सुंदर और सुनहरे हो जाते हैं। 
  • बड़ की जटा और काले तिल समभाग खूब महीन पीसकर सिर पर लगाकर आधा घंटे बाद कंघी से केशों को साफ कर ऊपर से भांगरा और नारियल की गिरी दोनों को पीसकर लगाते रहने से बाल कुछ दिन में ही लंबे हो जाते हैं। 
  • बहेड़ा के फल की गिरी का तेल बालों के लिए अत्यंत ही पौष्टिक है।  इससे बाल स्वस्थ हो जाते हैं। 
  • बालों को उस्तरे से साफ करें, अगर बालों को साफ करने में आप सक्षम नहीं है तो बालों को छोटा करके उस स्थान पर भांगरे के पत्र के स्वरस की मालिश करें।  इससे कुछ ही दिनों में अच्छे काले बाल निकल आते हैं।  जिनके बाल टूटते हैं या दो मुंहे हो गए हैं, उन्हें इस प्रयोग को अवश्य ही करना चाहिए। 
  • त्रिफला के चूर्ण को भांगरे के रस की तीन भावनाएं देकर अच्छी तरह से सुखाकर खरल कर लें।  प्रतिदिन प्रातः डेढ़  ग्राम सेवन करने से बालों को सफेद होने से और उड़ने-गिरने से भी रोकता है। नेत्र ज्योति को भी बढ़ाता है। 
  • आंवले का मोटा चूर्ण कर चीनी मिट्टी के प्याले में रखकर ऊपर से भांगरे का इतना रस डालें की आंवला उसमें डूब जाए।  फिर खरल कर सुखा लें।  इस प्रकार 7 भावना  देकर सुखा लें।  प्रतिदिन 3 ग्राम की मात्रा में ताजे जल के साथ सेवन करने से असमय बालों का सफेद होना रुक जाता है और बालों के उड़ने-झड़ने की समस्या भी दूर होती है।  यह नेत्र ज्योति को बढ़ाने वाला आयुवर्धक रसायन और सर्वरोग हर योग है। 
  • भांगरा, त्रिफला, अनंतमूल, आम की गुठली-  इन सबका कल्क  प्रसिद्ध प्रत्येक 20-20 ग्राम और 10 ग्राम मंडूर कल्क और आधा किलो तेल एवं 1 किलो जल में एकत्र कर पकाएं।  तेल मात्र शेष रहने पर छानकर रख लें।  इस तेल से सिर की मालिश करने से बालों के सब प्रकार के रोग दूर होते हैं। 
  • ब्राह्मी के पंचांग का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से कुछ सप्ताह सेवन करने से बालों के झड़ने की प्रवृति से छुटकारा मिलता है।  यह प्रयोग निर्बलता निवारण में भी लाभदायक है। 
  • गंजापन दूर करने के लिए काली गाय के मूत्र में गुड़हल के फूलों को पीसकर लगाने से बाल बढ़ते हैं तथा गंजापन दूर होता है। 
  • गुड़हल के पत्तों को पीस कर लुग्दी बनाकर बालों में लगाएं।  2 घंटे बाद बाल धोकर साफ़ कर लें।  इस प्रयोग को नियमित रुप से करते रहने से न केवल बालों को पोषण मिलेगा, अपितु सिर में शीतलता का भी अनुभव होगा। 
  • गुडहल के ताजे फूलों के रस में समभाग जैतून का तेल मिलाकर आग में पका लें।  जब केवल तेल शेष रह जाए, तो शीशी में भरकर रख लें।  प्रतिदिन बालों में मलकर जड़ों तक लगाने से बाल चमकीले और लंबे होते हैं। 
  • गुडहल के फूल और भृंगराज के फूल, भेड़ के दूध में पीसकर लोहे के पात्र में रखें।  सात दिन के बाद निकालकर भृंगराज के पंचांग के रस में मिलाकर रात को गर्म कर बालों में लगाएं।  प्रातः सिर धोने से बाल काले हो जाते हैं और गंज भी दूर होता है। 
  • रक्त घृतकुमारी जिसमें ( नारंगी और कुछ लाल रंग के फूल लगते हैं ) के गूदे को स्प्रिट में गलाकर सिर में लेप करने से बाल काले होते हैं और गंजे सिर पर बाल उगाते हैं। 
  • कंटकारी ( कटेरी ) के पत्रों में 20-20 मिलीलीटर स्वरस में थोड़ा शहद मिलाकर मर्दन करने से कुछ ही दिनों में कीटाणु नष्ट होकर तथा त्वचा मुलायम होकर नए बाल आ जाते हैं। 
  • करंज के तेल को सिर में लगाने से इंद्रलुप्त में लाभ होता है। 
  • करंज के फूलों को 6-12 ग्राम पीसकर सिर में लेप करने से सिर की गंज में लाभ होता है। 
  • नीम के बीजों के साधारण तेल का विधिपूर्वक दो-दो बूंद नस्य लेने और केवल गाय के दूध का सेवन करने से बालों का असमय सफेद होना ठीक होता है और बालों की जड़े मजबूत होती है।  
  • नीम के बीजों को भांगरा और विजयसार के रस की कई भावनाएं देकर बीजों का तेल निकलवाकर दो-दो बूंद नस्य लेने से तथा आहार में केवल दूध -भात का प्रयोग करने से सफेद बाल काले हो जाते हैं और उनकी जगह भी मजबूत होती है। 
  • गंज पर तथा केश वृद्धि के लिए-- नीम-पत्र एक भाग, बेर-पत्र एक भाग-- दोनों को अच्छी तरह पीसकर इसका उबटन या लेप सिर पर लगाकर 12 घंटे बाद धो डालें। एक महीने में नए बाल उग आएंगे। 
  • नीम पत्रों को पानी में खूब उबालकर ठंडा हो जाने पर इसी पानी से सिर को धोते रहने से बाल मजबूत होते हैं। उनका गिरना या झड़ना रुकता है तथा वे काले भी होने लगते हैं।  इसके अतिरिक्त सिर के कई रोग फुंसियां निकलना भी बंद हो जाता है। 
  • नींबू के रस में आंवलों  को पीसकर बालों में लगाने से रूसी मिटती है और बालों का गिरना उड़ना मिटता है। 
  • मेथी दाना एक चम्मच और बेर के 10-15 पत्ते बारीक पीसकर सिर में लगाएं तथा एक घंटे बाद सिर धो लें।  बाल घुंघराले होंगे और उनमें मजबूती भी आएगी। 
  • गंजेपन में जब सिर के बालों में रुसी पड़ गई हो तब तिल के फूल तथा गोक्षुर बराबर लेकर घी तथा मधु में पीसकर सिर पर लेप करने से गंजापन दूर होता है। 
  • 2 से 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण में 125 मिलीग्राम लौह भस्म मिलाकर प्रातः   सायं सेवन करने से बाल गिरने बंद हो जाते हैं। 
  • बालों को प्रतिदिन स्वच्छ जल से धोएं।  फिर सुखाकर शुद्ध नारियल तेल को बालों की जड़ों में मलना लाभप्रद है। 
  • बालों को साबुन या शैंपू से न धोकर काली मिट्टी या रीठा से धोऐं।  कोई भी तेल बालों को सुखाने के बाद उनकी जड़ों में मालिश करना लाभप्रद है।
  • आंवला ( सूखा ), भृंगराज ( सर्वांग सूखा ), माजूफल, आम की गुठली की गिरी समभाग लेकर चूर्ण बना लें तथा रात में जल में भिगोकर रख दें।  सुबह उस जल से बालों को मलकर ऐसा धोएं कि यह पानी बालों की जड़ों में समा जाए।  इस प्रयोग से गंज रोग दूर होता है। 
  • सिर, मूंछ या दाढ़ी के बाल उड़ गए हों तो प्याज का रस और शहद का लेप कुछ दिनों तक करें।  कुछ ही दिनों के प्रयोग से बाल उग आते हैं। 
  • नींबू के बीज आवश्यकतानुसार लेकर पानी में पीसकर प्रतिदिन लेप करने से बाल उग आते हैं। 
  • ताजे धनिए का रस कुछ दिनों तक निरंतर सिर पर मलने से गंज रोग नष्ट हो जाता है। 
  • गंजापन के रोगी को कब्ज की शिकायत रहती हो तो सबसे पहले उदर की शुद्धि करनी चाहिए।  इसके लिए रात्रि को सोने से पहले एक चम्मच इसबगोल या त्रिफला चूर्ण उष्ण जल या दूध के साथ सेवन करें। 
  • आंवला, शिकाकाई और रीठा को बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर जल में रात्रि में भिगोकर रखें और प्रातः काल सिर धोएं।  इससे बालों के गिरने की विकृति नहीं होती है। 
  • अनंतमूल का चूर्ण बनाकर 5 ग्राम प्रतिदिन जल के साथ सेवन करने से इंद्रलुप्त ( गंजापन ) की विकृति नष्ट होती है। 
  • नारियल के तेल में नीम का तेल मिलाकर कुछ दिनों तक गंज की जगह पर मलने से बाल फिर से उगने लगते हैं। 
  • बेल का रस और इंद्रायन की लता को पीसकर रस निकालें और इस रस से प्रतिदिन बालों की जड़ों में मालिश करें।  इससे इंद्रलुप्त रोग में लाभ होता है। 
  • कलिहारी की जड़ को गोमूत्र में घिसकर या पीसकर सिर में लेप करने से गंजापन दूर होता है। 
  • मधु और कटेरी का रस मिलाकर दो महीने तक मलने से बाल फिर से उगने लगते हैं। 
  • अपामार्ग के पत्तों को सरसों के तेल में जलाकर गंज स्थान पर मलने से कुछ ही दिनों में ही बाल उगने शुरू हो जाते हैं।  

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