शहद एक प्राकृतिक पेय है और कार्बोहाइड्रेट का एक अत्यंत ही सुपाच्य रूप है। क्योंकि शहद में डेक्सट्रिन होता है। डेक्सट्रिन पाचन की जटिल प्रक्रिया से गुजरे बिना सीधे रक्त में मिल जाता है। एक पौंड शहद 1450 केलोरी ऊर्जा देता है।
एक चम्मच शहद पीने से व्यक्ति को 10 मिनट से कम समय में ही ऊर्जा प्राप्त होती है। रक्त धारा में गुजरने वाले ग्लायकोजन से हमें वही ऊर्जा प्राप्त होती है। जो नियमित आहार लेने के बाद प्राप्त की जा सकती है। शहद की कोई निश्चित मात्रा नहीं है। शहद लेने की मात्रा परिश्रम की मात्रा पर निर्भर करती है। शारीरिक श्रम कम करने वाले लोगों को पतले रूप में शहद की मात्रा कम लेनी चाहिए ।
अधिक कार्य करने वाले लोगों के लिए शहद की मात्रा बढ़ाई जा सकती है तथा गाड़े रुप में लिया जा सकता है ।
शहद को उसी रूप में खाली पेट कभी नहीं लेना चाहिए क्योंकि अपने आर्द्रताग्राही स्वरूप के कारण शहद पेट में पानी की मात्रा को अवशोषित कर पेट में दर्द उत्पन्न कर सकता है। जब खाली पेट शहद लेना हो तो उसमें पानी मिलाकर पतला कर लेना चाहिए । शहद ह्रदय के लिए उत्तम टॉनिक है।
विश्राम कर लेने वाली अन्य स्वैछिक मांसपेशियों की तुलना में हृदय को लगातार काम करना पड़ता है।
इसलिए यह जरूरी है कि खाए जाने वाले आहार ऊर्जादायक हों। शहद एक ऐसा ही उत्तम आहार है।
अन्य आहारों की उनके उर्जा देने से पहले पाचन होता है लेकिन शहद से तुरंत ऊर्जा प्राप्त होती है।
शहद कमजोर हृदय, कमजोर मस्तिष्क तथा कमजोर पेट को मजबूत करता है। कुपोषण के मामले में भी उपयोगी होता है | इसे सामान्य शारीरिक मरम्मत के लिए भी लिया जा सकता है।
शहद जीवाणुओं को भी नष्ट करने का काम करता है और शरीर को रोगों का प्रतिरोध करने में समर्थ बनाता है।रोगाणु शहद में नहीं बढ़ सकते हैं।
शहद श्वसनी-नजला, गलरोध, खांसी तथा सर्दी में भी उपयोग होता है। मधुमेह के रोगी को भी शहद लेने से फायदा होता है।
शहद दूध, मक्खन या मलाई के साथ लिया जा सकता है। शहद अत्यधिक उद्दीपन होता है।
यदि आप अधिक परिश्रम से थक-हार जाने पर गर्म पानी के साथ एक चम्मच शहद लेते हैं तो यह आपको तुरंत तरोताजा कर देता है| दस बादाम रात भर पानी में भिगोकर रखें और
सुबह छिलके उतार दें । उन्हें दो चम्मच शहद के साथ लें। यह एक मस्तिष्क टॉनिक की तरह काम करता है | बच्चों में प्रारंभ से ही शहद की आदत डालनी चाहिए। बच्चों के दूध में चीनी के स्थान पर
शहद मिलाएं। शहद का अधिक मात्रा में तथा परिष्कृत चीनी का कम मात्रा में सेवन बच्चों का अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित करता है।
फोड़ों तथा बारी घावों के इलाज में भी शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है। साबुन में मिलाकर फोड़ों पर लगाने से शहद उसमें मौजूद मवाद तथा नमी को शीघ्र खींच लेता है। तथा शरीर को साफ करता है।
जले हुए भाग पर शहद तुरंत लगाने से छाले नहीं पड़ते हैं। यह जलन भी कम करता है। शहद के नियमित प्रयोग से जलने से पड़े दाग दूर हो जाते हैं।
शहद का औषधीय उपयोग :
- एक गिलास गर्म दूध में 2 चम्मच शहद डालकर पीने से कब्ज की शिकायत दूर होती है।
- गेहूं के आटे के साथ शहद गूंथकर सूजन पर लगाने से सूजन दूर हो जाती है तथा फोड़े पर लगाने से फोडा पक जाता है।
- सिरका और नमक के साथ शहद मिलकर लगाने से शरीर के दाग-धब्बे दूर होते हैं।
- तिलों को पीसकर शहद में मिलाकर मरहम बनाकर घावों पर लगाने से घाव अतिशीघ्र भर जाते हैं।
- दो तीन चम्मच शहद रोजाना दिन में तीन चार बार सेवन करते रहने से हार्ट अटैक होने की आशंका दूर होती है।
- प्यास लगने की शिकायत हो तो शहद को जल के साथ दिन में दो-तीन बार लेना चाहिए इससे प्यास की अधिकता कम हो जाती है।
- यकृत की निर्बलता मैं गाय के दूध में शहद मिलाकर सेवन करने से विशेष रूप से लाभ होता है यकृत की निर्बलता इससे दूर तो होती ही हैसाथ ही यकृत की कार्यशीलता में भी सुधार होता है।
- खाना खाने के बाद एक 2 ग्राम शहद चाटने से भोजन जल्दी हजम होता है तथा पाचन शक्ति में वृद्धि होती है।
- पिसी हुई पीपल के साथ शहद लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता है पेट दर्द में पीपल का चूर्ण 6 माशा और शहर शहर शहद 2 तोला मिलाकर सेवन करने से तुरंत आराम मिल जाता है।
- तुलसी के पत्तों का रस शहद समान मात्रा में मिलाएं तथा जुकाम होने पर इस मिश्रण को चाटे काफी राहत मिलती है।
- बच्चों के साथ दांत निकलते समय शहद मसूड़ों पर मलते रहने से बिना कष्ट के सरलता से दांत निकल आते है।
- शुद्ध फिटकरी शहद और सिरका को सममात्रा में मिलाकर सुबह-शाम दांतों पर मलने से दांतों का हिलना बंद हो जाता है।
- सोने का वर्क शहद के साथ सेवन करने से आंखों की ज्योति बढ़ती है।
- काली मिर्च, सौंठ, पीपल के चूर्ण को शहद के साथ सेवन करने से कफ जनित मल निकलकर श्वास कष्ट में लाभ होता है।
- आधे सिर के दर्द में और दर्द के विपरीत ओर की नासिका में शहद की एक-दो बूंद डालने से आराम मिलता है।
- जोड़ों के दर्द और सूजन में शहद सेवन करते रहने से पोटाशियम की पूर्ति होकर रोग शांत हो जाता है।
- पक्षाघात, लकवा ऐंठन और स्नायु रोग में दो-चार चम्मच दिन में दो- चार बार शहद लेते रहने से काफी फर्क पड़ता है। शहद कैल्शियम की मात्रा की पूर्ति करता है।
- सर्दी के मौसम में एक पाव दूध में दो चम्मच शहद मिलाकर 21 या 40 दिन नियमित रूप से सेवन करने से शरीर हष्ट पुष्ट और मजबूत हो जाता है।
- टाइफाइड ज्वर की कमजोरी में शहद का सेवन करने से कमजोरी दूर होकर भीतरी शक्ति का विकास होता है।
- दो-दो बूंद शहद दुखती आंख में डालने से आंखें ठीक हो जाती हैं।
- प्याज का रस और शहद समान मात्रा में लेकर प्रतिदिन दो-तीन बार आंखों में डालने से मोतियाबिंद में आराम मिलता है।
- सफेद प्याज का रस और शहद मिलाकर सेवन करने से वीर्य की अधिक उत्पत्ति होती है तथा बाजीकरण शक्ति बढ़ती है या भैंस के दूध में दो बड़े चम्मच शहद भली प्रकार मिलाकर पीने से शारीरिक बल और शक्ति में वृद्धि होती है।
- छोटे बच्चों को शहद चटाने से उनका गला साफ रहता है तथा अजीर्ण एवं ऐठन की भी शिकायत नहीं होती है।
- कमजोर और शक्तिहीन व्यक्तियों एवं बच्चों को प्रतिदिन एक एक चम्मच चार बार पानी के साथ पीना चाहिए क्योंकि पोषक तत्व उपलब्ध कराने में अकेला शहद ही काफी है इसमें कार्बोहाइड्रेट्स खनिज एमिनो एसिड प्रोटीन और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
- कुष्ट रोग में बकरी के दूध के साथ एक से दो तोला तक शहद सेवन करने से विशेष लाभ होता है इस रोग में नमक का सेवन शक्ति में वृद्धि होती है।
- शहद स्त्री रोगों के लिए अत्यंत ही उपयोगी औषधि है। शहद का नियमित रूप से सेवन जो स्त्री करती है उसे गर्भाशय मूत्र और मासिकधर्म संबंधी रोग नहीं होते हैं, और यदि है भी तो ठीक हो जाते हैं।
- शरीर का अंग कट गया हो और खून रुक न रहा हो तो आटे में शहद को मिलाकर उपयोग करें इसके प्रयोग से खून का बहना बंद हो जाता है।
- स्त्री मासिक स्नाव के समय आंवले को उबाल कर शहद मिलाकर दिन में दो बार उपयोग करें तो मानसिक स्नाव संबंधी पीड़ा उन्हें परेशान नहीं करती है।
- आंवले के चूर्ण के साथ शहद को मिलाकर प्रयोग करने से तकलीफ देह सूखी खांसी में विशेष लाभ होता है।
- नींबू के रस में शहद को मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा की खुश्की दूर होती है।
- दो दो या तीन तीन चम्मच शहद दिन भर में तीन चार बार प्रतिदिन खाते रहने से लंबी आयु होती है बुढ़ापे में भी जवानी का आनंद लिया जा सकता है।
- शहद का नियमित सेवन करने से नामर्द भी मर्द बन जाता है शहर में दूध से 6 गुना अधिक शक्ति होती है
- 12 वर्ष तक की आयु के बच्चों को सोते समय एक दो चम्मच शहद मिलाकर सेवन करवाते रहने से उन का बिस्तर पर पेशाबकरना बंद हो जाता है।
- एक दो चम्मच शहद प्रतिदिन एक दो बार निरंतर एक 2 सप्ताह तक सेवन करते रहने से आंखें बार-बार झपकाने का रोग ठीक हो जाता है।
- दो तीन चम्मच शहद दिन में एक दो बार तथा रात को सोते समय सेवन करने से अनिद्रा दूर होकर गहरी नींद आती है।
- मोटापे को कम करने के लिए एक गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़कर एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पिए।
- पित्त तथा रक्त विकार में शहद को दूध में मिलाकर पीने से विशेष लाभ होता है और कुछ दिन तक नियमित लेने से यह विकृतियां दूर हो जाती हैं।
- कीड़े लगे दांत में दर्द होने पर दर्द वाले स्थान में रूई के फाहे में शहद को रखने से दांत का दर्द मिट जाता है।
- शहद दांत और मसूड़ों के लिए भी लाभदायक है शहद को रोजाना मंजन की तरह मलने से दांत साफ हो जाते हैं मसूड़े मजबूत हो जाते हैं और मुंह के अंदर के घाव में भी आराम हो जाता है।
- जुकाम एक ऐसा रोग है जो हर किसी को और हर मौसम में होता ही रहता है जुकाम होने पर नींबू का रस और दो तीन चम्मच शहद दिन में दो तीन बार सेवन करने से लाभ होता है या एक चम्मच अदरक को शहद के साथ सेवन करना भी लाभप्रद है।
- शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए तथा कार्बनिक तत्व और खनिजों की कमी को पूरा करने के लिए मक्खन या घी के साथ शहद लेने से लाभ होता है।
- शहद का नियमित सेवन ऐंठन के प्रभाव को कम करता है ऐंठन सामान्यतः उस समय होती है जब रक्त में मौजूद कैल्शियम निम्न स्तर पर होता है और फास्फोरस स्तर उच्च होता है| शहद का सेवन करने से आवश्यक स्तर रक्त में आ जाता है।
- क्षय रोगियों की पाचन प्रणाली अक्सर ही कमजोर हो जाती है उनके लिए शहद आदर्श आहार है। शहद न केवल आसानी से हजम हो जाता है। बल्कि यह तुरंत उर्जा भी प्रदान करता है। इसके अलावा शहद नई रक्त कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा देकर उसे नया बनाता है| इसलिए क्षय रोगियों को चाहिए कि वह सुबह तथा शाम दोनों समय शहद का सेवन करें।
- शरीर की उत्सर्जन प्रणालियों को उचित रूप से काम करना चाहिए जिससे शरीर का क्रियाकलाप समुचित रूप से चले गुर्दों के अच्छी तरह से काम न करने से मूत्र मार्ग में मूत्राम्ल का अधिक संचयन होने लगता है यही बाद में आगे चलकर पत्थरी रूप में ले लेता है। भोजन में शहद का नियमित समावेश इस समस्या को दूर करता है और रक्त शोधक के रूप में कार्य करते हुए शहद शरीर को स्वच्छ रखने में सहायक होता है।
- बुखार में अक्सर की सामान्य पाचनक्रिया गड़बड़ा जाती है। ऐसे में रोगी को एक गिलास पानी में एक चम्मच मिलाकर देने से उसे उर्जा मिलती है और उसके स्वास्थ्य में जल्दी सुधार होता है।
- शहद ऊर्जा दायक होता है जब लगातार उल्टी आने से पेट कोई भी आहार ग्रहण करने की स्थिति में नए हो तब शहद का सेवन पानी के साथ करें।
- आधा आधा चम्मच अदरक का रस, नींबू का रस तथा शहद में मिलाकर लेने से मिचली तथा चक्कर आने की बीमारियों के मामलों में लाभकारी है।
- एक चम्मच शहद और एक चम्मच सफेद आटा मिलाएं तथा इसमें गुलाब जल की भी कुछ बूंदे डालें । इस लेप को चेहरे पर लगाएं और आधे घंटे तक यूं ही रहने दें। फिर इसे मुलायम कपड़े का इस्तेमाल करते हुए ठंडे पानी से धो दें | साफ-सुथरे रंग रूप के लिए यह लेप 2 सप्ताह में एक बार लगना चाहिए।
- दो चम्मच छने हुए शहद में एक चम्मच बादाम का तेल मिलाकर लोशन तैयार करें और यह लोशन त्वचा को सुंदर बनाने के अलावा उसे तरोताजा बनाता है तथा उसका पोषण भी करता है।
- मध्यम आकार के एक नींबू के रस के साथ एक चम्मच शहद प्रतिदिन सुबह नाश्ते के पहले लेने से रंग रूप निखरता है इससे वजन कम करने में भी मदद मिलती है।
- गठिया तथा संधिवात के लिए भी शहद बहुत ही गुणकारी है शहद में निष्प्रभवक एसिड होते हैं यह सिर्फ संधिवात के अलावा गठिया, मांशपेशी क्षय और स्नायु के रोगों में विशेष रुप से असरदार होते हैं। इन रोगियों को एक से दो चम्मच शहद नियमित रूप से औषधि के रूप में अवश्य ही लेने चाहिए। गठिया के रोगी के हाथों तथा पैरों पर गर्म मधु-मोम लगाने से भी लाभ होता है।
- प्याज के रस के साथ भी गले की खराबी में शहद का प्रयोग गुणकारी है - एक गिलास पानी गरम करें इसमें नींबू के आकार के प्याज का रस मिलाएं । पानी की लगभग आधी मात्रा के बराबर शहद मिलाएं |इस गोल को शहद के पूरी तरह घुल जाने तक पकाएं और एक-एक घंटे पर एक चम्मच दें। यह मिश्रण लेने से गले की श्लेष्मल झिल्लियों में जलन नहीं होने पाती है।
- कफ नाशक के रूप में शहद का प्रयोग किया जाता है यह कफ को बाहर निकालने का भी काम करता है। शहद व नींबू के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर तथा धीमी आंच पर गर्म कर लें यह गले के लिए अच्छा होता है बच्चों को इस मिश्रण को बराबर मात्रा में पानी मिलाकर पीने से लाभ होता है।
- एक कप गाढ़ा शहद में एक चम्मच अदरक तथा एक नींबू का रस मिलाएं। इस मिश्रण को 15 मिनट तक उबालें। खांसी, जुकाम, सर्दी में यह कफसिरप हर एक या 2 घंटे पर एक या दो चम्मच लें। गर्म दूध के साथ शहद गलशोध के लिए अच्छा रहता है।

